
Fernanda e Alexandre
Fernanda e Alexandre disseram “sim” rodeados de amor, histórias e pessoas que fazem parte da caminhada deles. Nossa conexão vem de longa data, de momentos importantes da família, e acompanhar esse casal até o dia do casamento foi mais do que um registro: foi testemunhar uma história que amadureceu com o tempo.
Mesmo com a timidez que sempre fez parte deles, no grande dia tudo fluiu com naturalidade. Os olhares falavam mais que as palavras, os sorrisos surgiam sem esforço e cada gesto carregava verdade. Entre a emoção da cerimônia e a energia contagiante da festa, ficou claro que aquele não era apenas um casamento, mas a celebração de uma parceria construída com carinho, respeito e muita cumplicidade.
Foi um dia leve, intenso e cheio de significado. Um daqueles dias em que o tempo passa rápido demais, mas deixa lembranças que permanecem para sempre, fotografar esse casamento foi mais do que registrar um evento: foi transformar sentimentos em memória, instantes em eternidade. Um dia vivido com o coração aberto, que agora segue guardado em imagens que contam, com delicadeza, o início de um novo capítulo.
![]() | ![]() | ![]() |
|---|---|---|
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |
![]() | ![]() | ![]() |

























































































































































































